प्राकृतिक खेती क्या हैं? इससे यु पी किसानो को क्या फायदा हैं| Gannaparchi |caneup

भारत के बहुत से हिस्सों में जैविक खेती Gannaparchi की ओर किसानों का झुकाओ तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गन्ने भी बिना किसी केमिकल से उगाय जा रहे है।

इस जैविक गन्ने से तैयार होने वाले गुड़ को भारत भर में बहुत पसंद किया जा रहा है। आलम यह है कि बाजारों मैं इनकी कीमत और मांग दोनों बढ़ रही हैं। बुलंदशहर जिले के प्रगतिशील किसान संजीव कुमार अपना गुड़ बना रहे हैं और वह गुड़ बनाकर इसे मार्केट मैं 100 रुपए किलो बेच रहे हैं, और इनके बनाये गुड़ की माँग दिन बा दिन बढ़ती जा रही हैं|

Gannaparchi

प्राकृतिक खेती करने के लिए मिला ‘पद्मश्री’ पुरुस्कार |Gannaparchi|

पश्चिमी उतर प्रदेश में जैविक खेती का चलन बढ़ रहा है। पिछले साल प्राकृतिक तरीके से खेती करने पर बुलंदशहर जिले के स्याना के प्रगतिशील किसान भारत भूषण त्यागी को गोवर्नमेंट ने ‘पद्मश्री’ पुरुस्कार से नवाजा था। अब उनके पास जैविक खेती के तरीके सीखने वालों की संख्या लगातार बढ़ती चली जा रही है। इनमें नोजवां किसानों की संख्या ज्यादा है। भारत भूषण बताते हैं कि जैविक खेती के लिए किसानों का रुझान बढ़ रहा है और वे पुराने तरीके से खेती छोड़कर नये तरीकों से खेती कर रहे हैं।

अपने आप मै ही तैयार कर रहे गुड़ और शक्कर|Gannaparchi|

संजीव जी बताते हैं कि प्रकर्तिक तरीके से उगाए जाने वाले गन्ने से वह अपने आप ही गुड़, शक्कर, राब बना रहे हैं। इसमें गुड़ को कई तरह से बनाया जाता है। चना कोटिड युक्त गुड़ उनका पसंदीदा प्रोडक्ट है। इसमें चने को भूनकर गुड़ तय्यार किया जाता है। इसमें अच्छे तरीके का प्रयोग किया जाता है। लोहे की एक कढ़ाई पर लेप किया जाता है। इसमें 118 डिग्री सेंटीग्रेट पर गुड़ बनता है। लोहे की हल्की का इस्टेमाल करके जल्दी इस तापमान पर पहुंच जाते हैं। इसी तरह से लोहे की कढ़ाई को ठंडा भी एकदूम किया जाता है। चिमनी को भी बाद मै फिल्टर कर देते है।

100 रुपए किलो तक मैं बिक रहा है गुड़|Gannaparchi

किसान संजीव जी के हाथो द्वारा बनाया गया गुड़ बाजार से दोगुने दाम में बिकता है। इस गुड़ को मैराठ, जयपुर, दिल्ली, नोएडा, चंडीगढ़, ग़ाज़ियाबाद समेत भारत के बहुत हिस्सों में बेचने के लिए भेजा जाता है। इस गुड़ की मांग हररोज बढ़ती ही चली जा रही है। और इस मांग को वह पुरा करने मै असमर्थ हैं|

खेत में ही बना डाली पोषण वाटिका |Gannaparchi|

किसान संजीव जी ने अपने ही खेतों में पोषण वाटिका बना डाली है। इस वाटिका में सभी फलों के पौधे लगाए हैं। इंसान को शक्ति देने वाले सभी फल इस वाटिका से आसानी से मिल जाते हैं। इसके साथ ही गरीब लोगो की मदद के लिए भी उन्होंने चौपाल फाउंडेशन बनाया है। इसके लिए किसानों की मदद के लिए चौपाल भी लगाई जाती है। किसानों को प्रकर्तिक खेती के लिए भी जानकारी दी जा रही है|

उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों में भी हो रही जैविक खेती Gannaparchi

बुलंदशहर जिले के साथ ही उत्तर प्रदेश के हापुड़, गाजियाबाद, बागपत, मेरठ जिलों में जैविक तरीके से खेतीबाड़ी की जा रही है। बागपत जिले के रावण उर्फ बड़ागांव में रिटायर्ड कर्नल नरेंद्र त्यागी ने अपना प्रकर्तिक फार्म हाउस बनाया है, जिसमें जैविक तरह से खेतीबाड़ी की जा रही है। मेरठ जिले के पूठी ग्राम के निवासी रमन त्यागी भी प्रकर्तिक तरीके से खेतीबाड़ी कर रहे हैं। मेरठ के किसान राजेश शर्मा भी प्रकर्तिक तरीके से तैयार गुड़ को बना कर सप्लाई कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में बढ़ रहा प्राकृतिक खेती का रुझान

यु पी सरकार किसानों को लगातार जैविक खेती के लिए उत्साहित कर रही है। उत्तरप्रदेश में प्रकर्तिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे खेती की पैसों की लागत तो कम होगी ही, साथ ही पैदावार में भी बहुत बढ़ोतरी होगी। दो साल में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 02 लाख 25 हजार 691 किसान को प्रकर्तिक खेती के लिए तय्यार कर दिये हैं। कृषि कॉलेजों द्वारा प्रकर्तिक खेती का शो कराया जा रहा है। यु पी सरकार प्रकर्तिक खाद की खरीद पर किसानों को अनुदान दे रही है। भारत सरकार की परंपरागत कृषि विकास योजना, नमामि गंगे योजना के तहत क्लस्टर बनाकर प्रकर्तिक खेती कराई जा रही है। इस योजना में पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ, हापुड़, वरनसी, चंदोली, कानपुर, संभल नगर, रायबरेली, फतेहपुर, प्रतापगढ़, अलाहबाद, मीरजापुर, मुज़फरनागर, अमरोहा, भदोही में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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